दोस्तों रोजमर्रा की जिंदगी में जब हमारे सामने कोई परेशानी आती है तो हम उस परेशानी से पीछा छुड़ाने के लिए कई बार ऐसा सोचते है कि अगर वो आत्महत्या कर लें तो सारी  समस्याओं  का समाधान हो जाएगा और हम उसके सामने घुटने टेक  देते है पर जब हम किसी मुसीबत का सामना डट कर करते है तो न केवल हमे जीत हासिल होती है बल्कि आत्म विश्वास भी मिलता है आज की कहानी पढ़ने के बाद आपको लगेगा कि दुनिया में कितना गम है मेरा गम कितना कम है

आज की हमारी कहानी है बनारस की रहने वाली प्रज्ञा प्रसून सिंह की,

 

बात है आज से 12 पहले कि जब प्रज्ञा 23 साल  की थी , एक आम लड़की की तरह अपनी आने वाली जिंदगी के ख़्वाब सजा रही थी उस समय प्रज्ञा ने फैशन डिजाइन में पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा किया था और जॉब के लिए काफी जगह आवेदन भी किया हुआ था इसी बीच प्रज्ञा के घरवालों ने उसकी शादी तय कर दी। और शादी बड़ी धूम धाम से हो गयी,सभी लोग बहुत खुश थे इस शादी से और प्रज्ञा भी,शादी के दो दिन बाद ही प्रज्ञा को दिल्ली से कैंपस प्लेसमेंट के लिए कॉल आयी जिसके लिए प्रज्ञा को जल्द ही जाना था शादी के मात्र 12 दिन बाद ही प्रज्ञा बनारस से दिल्ली की और अपनी मंजिल को पाने के लिए रवाना तो हुई थी लेकिन वो सफर प्रज्ञा की जिंदगी का ऐसा सफ़र साबित हुआ कि उनकी पूरी जिंदगी की दिशा ही बदल दी। 

हुआ ये की रात के दो बज रहे थे प्रज्ञा और सभी यात्री ट्रेन के उस कंपाटमेंट में सो रहे थे तभी अचानक प्रज्ञा को पुरे POORE शरीर में बहुत तेज जलन महसूस होने लेगी,प्रज्ञा का पूरा बदन एक अजीब से प्रदार्थ से आग की तरह जले जा रहा था प्रज्ञा को कुछ समझ नहीं आरहा था की उसे अचानक से क्या बीमारी हो गयी। उस कंपाटमेंट में तब तक हल बहुत ज्यादा मच गयी थी सभी लोग प्रज्ञा को असहाय हो कर देख रहे थे  तभी किसी ने बीच जंगल में ट्रेन की चैन  खींच दी। ..अब तक ये खबर  दूसरे डिब्बों में मौजूद यात्रियों तक पहुंच चुकी थी किस्मत से उन यात्रियों में से एक लेडी डॉक्टर भी थी प्रज्ञा के साथ हुई घटना को सुनकर वो जब प्रज्ञा के पास पहुंची तब तक प्रज्ञा के कपड़े गल चुके थे डॉक्टर ने बताया कि तुम पर किसी ने एसिड से हमला कर दिया है। …

ये सुन कर प्रज्ञा बहुत डर गयी लेकिन फिर भी उन्होंने हिम्मत से काम लिया और जैसा -जैसा डॉक्टर ने कहा वैसा ही किया उस स्थिति में। .. ट्रैन एक बार फिर चल सभी सह यात्री अपनी अपनी बोतलों से प्रज्ञा के  ऊपर पानी डाल दाल रहे थे ताकि उनके शरीर के जलन कम हो। .इसके बाद इटावा स्टेशन आया प्रज्ञा को स्टेशन से आगरा हॉस्पिटल में ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरो ने प्रज्ञा की हालत  को देखते हुए उनको  ICU में एडमिट किया। लेकिन इस दौरान प्रज्ञा के  ऊपर जिस आदमी ने एसिड  से हमला  किया था वो भी प्रज्ञा के साथ हॉस्पिटल तक साथ आया और वो दुबारा से प्रज्ञा के ऊपर एसिड से हमला करना चाहता था और इसलिए ICU में घुसने की  कोशिश के दौरान वो रंगे हांथो एसिड सहित पकड़ा गया…. तब तक प्रज्ञा के परिजन तथा कुछ दोस्त हॉस्पिटल पहुंच चुके थे और उन्होंने उस आदमी को पहचान लिया,और पुलिस को बताया की ये व्यक्ति प्रज्ञा से शादी करना चाहता था जोकि उम्र में प्रज्ञा से दस साल बड़ा था जिस वजह से प्रज्ञा और उसके घरवालों ने शादी से  इंकार कर दिया।  ये बात उसको इतनी नागवार गुजरी की वो प्रज्ञा की जिंदगी ख़राब कर देना चाहता था। …..इन सबके बीच आगरा के जिस हॉस्पिटल में प्रज्ञा को एडमिट कराया गया वहाँ  के डॉक्टर ने प्रज्ञा की हालत बिगड़ती देख दिल्ली के लिए रेफर किया। … दिल्ली लाने के बाद प्रज्ञा को होश आया और फिर लगभग चार महीनो तक सफदरजंग हॉस्पिटल में प्रज्ञा का इलाज चला। इन सब के बीच भी प्रज्ञा को सबसे ज्यादा दुःख अपने इंटरव्यू  के मिस होने का था क्यूंकि उनको लगता था की चार महीने के इलाज के बाद वो ठीक हो जाएँगी और इनकी लाइफ फिर से नार्मल हो जाएगी पर इसके बाद चेन्नई में भी इलाज कराने और लगभग 12 सर्जरी से  गुजरने बाद प्रज्ञा ने उम्मीद छोड़ उनको समझ आ चुका था की वो अब नार्मल नहीं होने वाली है। लेकिन प्रज्ञा के ससुराल और उनके पति की जितनी तारीफ की जाये, उतनी कम है प्रज्ञा के पति उनको अपने साथ घूमने ले जाते,फिल्म दिखाने ले जाते और प्रज्ञा को विश्वास  दिलाते कि कुछ भी बदला नहीं है सब कुछ ठीक है हालाँकि अपनी सेहत का ख्याल रखने को जरूर कहा जाता ,यहाँ तक की प्रज्ञा के घरवालों ने अपने घर से सारे शीशे हटा दिए  ताकि प्रज्ञा लम्बे समय तक अपना चेहरा न देख सके,लेकिन बाथरूम में लगे एक शीशे जिसको तौलिया से ढक रखा था जैसे ही प्रज्ञा ने हटाया तो देखा की ……उनकी भौहें नहीं है एक आँख ख़राब हो चुकी है और चेहरा पूरी तरह से बिगड़ चूका था इस घटना दुबारा शीशा देखने के बारे सोचना छोड़ दिया…….

.इन सब घटनाक्रम के दौरान एक खबर बहुत तेजी से प्रसारित हो रही थी कि प्रज्ञा को पति ने छोड़ दिया और उसका तलाक़ हो चुका है कई बार सुनने को मिला की वो मर चुकी है इन सब तानो को सुनसुन कर प्रज्ञा अज़ीज़ आ चुकी थी इसलिए एक बार प्रज्ञा ने पति से बोला की तुम मेरी वजह से सारी जिंदगी क्यों लोगो के ताने  सुनोगे एक काम करो आप मुझे तलाक़ देकर दूसरी शादी कर लो…इसके ज़वाब में प्रज्ञा पति संजय  ने कहा कि “अगर उनके साथ ऐसी कोई घटना घट जाती तो क्या वो भी ऐसा ही करती ?” इसके बाद से प्रज्ञा के मन में अपने पति के प्रति इज़्ज़त और प्यार बढ़ गया।

 प्रज्ञा जब पहली बार गर्भवती हुई तो काफी डर रही थी कि इतनी सारी शारीरिक परेशानी झेलने के बाद उनके बच्चे पर इसका असर न पड़े और उनके बच्चे उनको माँ के रूप में अपनाये।और ऊपर वाले ने प्रज्ञा कि पुकार सुन ली और प्रज्ञा ने बिलकुल स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।और कुछ समय बाद प्रज्ञा ने दूसरी बेटी को भी जन्म दिया। जोकि पहले वाले की तरह बिलकुल स्वस्थ थी। ..

साल 2013 में प्रज्ञा ने एक NGO  की शुरुआत की जिसमे वो एसिड पीड़ित लड़कियों और महिलाओं  का मार्ग दर्शन करती है  साथ ही वो लोगो को अपनी NGO   माध्यम से स्किन दान करने को प्रेरित करती है

प्रज्ञा कहती है जिसने मुझे पर एसिड से हमला किया उसने सोचा होगा कि मै  कभी हंस नहीं पाऊंगी,पर मै अपने आप को ख़ुशनसीब मानती हूँ कि मुझे मेरे परिवार ने कभी ऐसा महसूस ही नहीं होने दिया कि मेरे साथ कोई घटना भी हुई थी और मै आज अपने परिवार के साथ शानदार जिंदगी जीती हूँ

 

 


2 Comments

Manoj mishra · June 19, 2018 at 7:28 pm

Ek sacchi baat mann ke jite jeet hai………

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Please wait...

Subscribe to our newsletter

Want to be notified when our article is published? Enter your email address and name below to be the first to know.