“सादा जीवन उच्च विचार” यह कहावत बिलकुल फिट बैठती है हमारी आज की कहानी के किरदार आशुतोष पर, जिनका परिचय कुछ शब्दों में दे पाना मुश्किल है जोकि एक जर्नलिस्ट, राजनेता, लेखक, संवेदनशील व्यक्ति होने के साथ-साथ एक अच्छे पति भी है

आप सभी लोगो ने आशुतोष को एक पत्रकार के तौर पर काफी लम्बे समय तक टेलीविज़न पर बड़े-बड़े राजनेताओं से सवाल-ज़वाब करते तो ज़रूर देख होगा और अपने पत्रकारिता के लम्बे करियर के बाद, एक राजनेता के रूप में भी देखा होगा। पर आपको बता दे कि जिस तरह से आशुतोष का करियर आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी है उसी तरह उन्होंने अपने निजी जीवन में भी उदाहरण पेश किया।

बात है साल 1988 की जब आशुतोष देश की राजनीती और पत्रकारिता में मह्त्वपूर्ण योगदान देने वाले जेनयू विश्वविद्यालय से सोवियत अध्ययन (वर्तमान में रूस) विषय में M. Phill कर रहे थे उसी दौरान वहाँ मनीषा तनेजा जोकि स्पेनिश विषय से ग्रेजुएशन की पढाई कर रही थी ।

एक दिन दोनों की मुलाक़ात कॉलेज के ही कॉमन दोस्तों के द्वारा हुई, सभी दोस्तों की तरह ही दोनों भी साथ घूमने और खाना-खाने जाया करते थे इस बीच 1990 में आशुतोष को साप्ताहिक हिंदुस्तान में सह-संपादक के तौर पर नौकरी मिल गयी,

जॉब में व्यस्त होने के कारण आशुतोष अपनी डॉक्टरेट की पढाई पर ज़्यादा ध्यान नहीं दे पा रहे थे जिस वजह से उनको अपनी पढाई के साथ समझौता करना पड़ा, लेकिन अपनी व्यस्तताओं के बीच भी आशुतोष, मनीषा से मिलने का समय निकल ही लेते थे.

समय अपनी गति से बीत रहा था साल 1994 में आशुतोष ने साप्ताहिक हिंदुस्तान छोड़ BITV न्यूज़ ज्वाइन किया, जो उस वक़्त का पहला न्यूज़ चैनल था वही दूसरी तरफ मनीषा ने अपनी पढाई जारी रखी और उन्होंने डॉक्टरेट में एडमिशन ले लिया, अब लगभग 6 साल एक अच्छे दोस्त के तौर पर साथ निभाते हुए दोनों को एक दुसरे में एक दूसरे का जीवनसाथी बनाने की संभावनाएँ दिखने लगी ।

इसके बाद जल्द ही दोनों ने शादी का निर्णय ले लिया, और इस बारे में अपने परिजन को भी जानकारी दी, हिन्दुतान जैसे देश में जहाँ आज भी शादी…… और वह भी लव मैरिज…… एक बहुत बड़ी बहस का मुद्दा बना रहता है वही आज से लगभग 24 साल पहले भी आशुतोष और मनीषा के परिजन का रवैया बहुत ही सकारात्मक था दोनों के माता-पिता ने बस इतना पूछा कि “जिसको आप जीवनसाथी बना रहे हो वह पढ़ा लिखा तो है न?”……..

जब दोनों ने एक-दूसरे के बारे में पूरी जानकारी दी, तो दोनों के परिजन ने हामी भरते हुए शादी की तैयारी करने को कहा, इस बात पर आशुतोष और मनीषा के विचार एक दम मिलते जुलते थे उन्होने अपने-अपने परिजन को बोला कि वह किसी भी तारीख़ और किसी भी दिन शादी कर सकते है सभी दिन अच्छे और शुभ है और वह किसी भी तरह के दिखावे में विश्वास नहीं रखते, इसलिए वह बहुत ही साधारण तरीक़े से कोर्ट में जाकर शादी कर लेंगे, यह सुनने के बाद दोनों के परिजन ने बोला कि ठीक है आप लोग कोर्ट से तारीख ले लो और हमे बता दो.हम लोग उस दिन दिल्ली आ जाएंगे, इसके बाद आशुतोष ने कोर्ट से तारीख निकलवा कर अपने परिजन को बता दी और दोनों के परिजन अपनी तैयारी के साथ तय किये हुए दिन दिल्ली पहुंच गए! जिस दिन कोर्ट में शादी होनी थी उस दिन दोनों परिवार के कुछ ख़ास-ख़ास सदस्य कोर्ट में पहुंच चुके थे.परन्तु कहानी में असली ट्विस्ट तो आना बाकि था

हुआ ये कि जिस मजिस्ट्रेट के सामने दोनों की शादी होनी थी वह उस दिन आया ही नहीं, कारण था उनके वक़ील ने उनको धोखा दिया। पैसे ले लिये और ये नहीं बताया कि मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने के एक माह बाद ही वह शादी करवाता है। चूँकि आशुतोष-मनीषा पेश नहीं हुये थे इसलिये वह आया नहीं। ऐसे में सभी लोग बड़े चिंतित हुए कि तभी आशुतोष को अपने कॉलेज के प्रोफेसर पुष्पेश पंत का ख्याल आया, जोकि आशुतोष और मनीषा को हमेशा सपोर्ट करते थे आशुतोष, प्रोफेसर पुष्पेश के घर को अपना घर ही मानते थे ऐसे में आशुतोष ने प्रोफेसर पुष्पेश को फ़ोन कर बताया कि वह आज शादी कर रहे है! यह सुनकर प्रोफेसर पुष्पेश, आशुतोष को बधाई देते हुए बोले”ये तो बहुत ख़ुशी की बात है कहाँ कर रहे हो, शादी?” उनका सवाल ख़त्म होता उससे पहले ही आशुतोष बोले। ……… “कि सर आपके घर पर” …

ये सुन कर प्रोफेसर पुष्पेश। ने थोड़ा हैरान होते हुए पूछा! कैसे? … तो आशुतोष बोले कि मैं घर आकर आपको सब बताता हूँ आशुतोष की बात सुनकर प्रोफेसर पुष्पेश ने सबको घर लेकर आने को कहा और साथ ही खुद इंतज़ाम में जुट गए, थोड़ी ही देर में दोनों परिवार प्रोफेसर पुष्पेश के घर पर थे इतनी देर में प्रोफेसर पुष्पेश जो इंतज़ाम कर सकते थे उन्होंने किया! लेकिन यहाँ भी एक कमी बाकि रह गयी और वह कमी थी शादी के लिए पंडित को तो बुलाया ही नहीं गया! हालाँकि आशुतोष और मनीषा किसी भी तरह के कर्मकांड से दूर क़ानूनी रूप से ही शादी करना चाहते थे लेकिन परिवार और दोस्तों के चलते औपचारिकता निभाने के लिए पंडित जी को बुलाना पड़ा। 

आपको बता दे कि जिस दिन आशुतोष और मनीषा की शादी थी किस्मत से उस दिन शहर में काफी सारी शादियाँ पहले ही थी तो ऐसे में सभी पंडित पहले से ही व्यस्त थे काफी ढूंढ़ने के बाद एक आर्य समाज मंदिर में एक पंडित मिल गए! लेकिन वह पंडित भी उस दिन व्यस्त थे ऐसे में आशुतोष के दोस्त जो पंडित को बुलाने गए थे

उनके पास जब कोई विकल्प नहीं बचा तो उन्होंने पंडित जी की एक न सुनी और उनको जबरदस्ती अपनी बाइक पर बैठाकर, प्रोफेसर पुष्पेश के घर ले आये, हालाँकि पंडित जी के आने का बाद भी किसी भी तरह का पूजा-पाठ नहीं किया गया, जिस वजह से घरवाले थोड़ा नाराज भी हुए. लेकिन इन सब उतार-चढ़ाव के बीच आशुतोष और मनीषा की शादी 23 JAN 1995 को दोनों के परिजन और कुछ ख़ास दोस्तों के समक्ष संपन्न हुई.

शादी के कुछ समय बाद एक तरफ जहाँ मनीषा ने अपनी डॉक्ट्रेट डिग्री हांसिल की, वही दूसरी तरफ आशुतोष आजतक न्यूज़ चैनल ज्वाइन कर चुके थे आजतक में आशुतोष ने 2006 तक काफी लम्बा समय दिया और इसके बाद आशुतोष ने IBN7 न्यूज़ ज्वाइन कर लिया, अब तक आशुतोष हिन्दुतान के नामचीन पत्रकारों में से एक बन चुके थे

और हिन्दुतान की राजनीती की अच्छी समझ उनको हो चुकी थी जिस वजह से अक्सर आशुतोष के सवालो के सामने बड़े-बड़े राजनेताओं के पसीने छूट जाते थे इतने सालो हिंदुस्तान की राजनीती को करीब से देखने और समझने वाले आशुतोष ने साल 2014 में अपने पत्रकारिता के प्रोफेशन को बाय-बाय कह दिया और देश की राजनीती में सक्रीय रूप से जुड़ गए, इसके बाद लगभग 4 सालो तक सक्रीय राजनीती का हिस्सा रहने के बाद हाल ही में आशुतोष ने राजनीती से अपनी दूरियाँ बना ली,

आज शादी के लगभग 24 साल बाद भी आशुतोष अपने व्यस्त दिनचर्या के बीच उनके सपोर्ट सिस्टम अपनी पत्नी जोकि उनकी अच्छी दोस्त भी है को समय देना नहीं भूलते और वही मनीषा जोकि दिल्ली यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ़ आर्ट विभाग में स्पेनिश भाषा की प्रोफेसर है अपने पति को हमेशा एक दोस्त की तरह ही मानती है और उनको हर तरह से सपोर्ट करती है

 

कपल मैसेज: आने वाली पीढ़ी के लिए आशुतोष और डॉ. मनीषा का सन्देश है कि वह जिसको भी अपना जीवन साथी चुनते है या चुनना चाहते है वह अपने पार्टनर को उनकी अच्छाई और कमियों के साथ अपनाये, न कि उसके नाड़ी-नक्षत्र, गुण देख कर…

 

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