आप सभी लोगो ने जादू की दुनिया के बेताज बादशाह जादूगर सम्राट शंकर के पोस्टर देश के हर शहर, हर गली-कूचे में ज़रूर देखे होंगे, अक्सर जादूगर सम्राट का जादू देखकर अच्छे-अच्छे दांतो टेल उंगलियाँ दबाने पर मज़बूर हो जाया करते है, जादूगर सम्राट शंकर ने देश ही नहीं बल्कि पुरिया दुनिया भर में अपने जादू के जलवे बिखरे, दुनिया का कोई ऐसा जादू नहीं जो वह कर न सके, फिर चाहे वह किसी इंसान को दो भागो में बाँट कर फिर जोड़ देना या फिर आँखों पर कितनी भी पट्टियाँ बांधकर पूरे शहर में बाइक पर घूमना ये सब मानों जादूगर सम्राट के बाए हाँथ का खेल हो।

लेकिन जादूगर सम्राट शंकर के इस स्तर तक पहुंचने के पीछे चंद दिनों की मेहनत नहीं बल्कि एक लम्बी तपस्या का परिणाम है और इस तपस्या की शुरुआत हुई 1962 में, जब जादूगर सम्राट की उम्र मात्र 12 थी उस समय शिव अग्रवाल (जादूगर सम्राट शंकर का असली नाम) जोकि एक मारवाड़ी परिवार से सम्बन्ध रखते है अन्य मारवाड़ी परिवार की तरह ही शिव के परिवार की प्राथमिकता बिज़नेस थी

 

उन दिनों जादूगर सम्राट के ग्रहनगर श्रीकरण पुर जिला गंगानगर (राज।) में बंगाल के मशहूर जादूगर देव कुमार आये हुए थे एक दिन शिव को भी जादूगर देवकुमार का जादू देखने का मौका मिला, जादूगर के जादू ने शिव के दिल पर ऐसी छाप छोड़ी कि उन्होंने जादूगर देवकुमार के द्वारा दिखाए गए जादू की नक़ल उतारने लगे, धीरे-धीरे शिव का झुकाव पढाई में कम और जादू में ज़्यादा लगने लगा और फिर उन्होंने जादू की ट्रैनिग लेने की सोची, लेकिन सब जानते है हिंदुस्तान जैसे देश में जादू जैसी कला को सब देखना तो चाहते है पर कोई भी अपने परिवार के व्यक्ति को जादू करते नहीं देखना चाहता कि वह उसको अपने करियर की तरह चुन सके.

ऐसा ही कुछ शिव के केस में भी था उनको पता था कि अगर उनको जादू सीखना है तो ऐसे तो कोई उनको जादू सिखने के लिए भेजने वाला नहीं है तो उन्होंने अपने घर में बोला कि उनको आगे की पढाई के लिए दुसरे शहर में जाना होगा। पढाई की बात सुनकर घरवाले शिव को अपने घर से दूर जाकर पढाई करने को भेजने के लिए तैयार हो गये। इसके बाद शिव सीधे बंगाल पहुंचे और वह पहुंच क्र विश्विख्यात जादूगर सम्राट B. N सर्कार को अपना गुरु बनाकर 5 सालों तक जादू सीखा। इन पांच सालो शिव ने वह हर प्रकार का जादू सीख लिया, जिस जादू की कला को देखने के लिए दूर-2 से लोग आया करते थे इसके बाद शिव अपने गृहनगर श्रीकरणपुर पहुंचे और वहाँ पहुंचते ही अपने पहले शो को अंजाम दिया। अपने पहले ही शो में शिव ने अपने जादू की कला से लोगो को मन्त्र-मुग्ध कर दिया। अपने पहले ही शॉ के बाद ही शिव, शिव से जादूगर सम्राट शंकर के नाम से मशहूर हो गए.

इस शो के बाद से जादूगर सम्राट को अपने जिले ही नहीं बल्कि दूसरे जिले से शॉ करने के ऑफर आने लगे। इसके बावजूद जादूगर और उनके परिवार को अजीब-सी समस्या का सामना करना पड़ रहा था वह थी जादूगर की शादी। इतना काबिल होने के बावजूद जादूगर सम्राट से कोई भी व्यक्ति अपनी बेटी की शादी नहीं करना चाहता था हर किसी को भ्र्म था कि कहि! जादूगर सम्राट शंकर उनकी बेटी को गायब न कर दे, जादूगर के लिए काफी सारे रिश्ते आये और वापस चले गए. जैसे-तैसे एक रिश्ते के लिए हामी हुई.

बड़ी ज़ोरो शोरो से शादी की तैयारी हुई, शादी के दिन सब लोग आ चुके थे शादी की रस्मों के दौरान पंडित जी ने वधू पक्ष से कन्या को लाने के लिए कहा, लेकिन कन्या तो जब आती जब वह होती वहाँ, ऐसे में सब लोग बहुत परेशां हुए… किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था काफी ढूढ़ने के बाद सब लोगो को जिसका अंदेशा था वही हुआ…सब लोग जादूगर शंकर को लेकर बात करने लगे कि जादूगर ने ही गायब कर दिया है उनकी बेटी को… और जादूगर पर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करने लगे… मामला बिगड़ता देख जादूगर के बड़े भाई जिन्होंने ये रिश्ता कराया था

उनके कान में बोले। भाई बड़ी मुश्किल से तो इस रिश्ते वालो को मैंने समझाया कि ऐसा कुछ नहीं होगा लेकिन तूने तो वही करके दिखा दिया, भाई तू अपना जादू का असर ख़तम कर दें। भाई की बात सुनकर जादूगर ने अपने जादू का असर खत्म कर दिया और उनकी होने वाली पत्नी सभी लोग को दिखाई देने लगी जो पहले से ही मंडप में मौजूद थी। कन्या को वापस देख कर सब लोग एक तरफ जहाँ राहत की सांस ले रहे थे वही दूसरी तरफ सब जादूगर की कला की तारीफ भी कर रहे थे।

शादी के बाद जादूगर सम्राट को उनकी पत्नी का भरपूर सहयोग मिला और जादूगर ने देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में जाकर अपनी कला का जादू बिखरने लगे। धीरे-धीरे जादूगर सम्राट शंकर दुनिया-भर के चुनिंदा जादूगरों में से बन गए. जादूगर सम्राट शंकर ने समय-समय पर हमेशा लोगो के सामने नए आयाम पेश करते गए और उन्नति की सीढिया चढ़ते गए. जादूगर का जादू देखने के कई-कई किलोमीटर तक की लाइनें लगने लगी, अकसर जादूगर सम्राट देश नामचीन व्यक्ति चाहे वह प्रधान मंत्री हो या राष्ट्रपति और या फिर बड़े-बड़े फ़िल्म अभिनेत्री और अभिनेता के सामने अपनी कला पर्दर्शन करते रहे। जैसे-जैसे जादूगर सम्राट मशहूर हो रहे थे वैसे-वैसे उनके नाम के साथ अनेक प्रकार के अवॉर्ड जुड़ते गए.

जिनमें से कुछ ख़ास, जैसे कि “भारत के सर्वश्रेष्ठ जादूगर” , राजस्थान का गौरव “स्वर्ण पदक” साल 1994 में “जादू भास्कर” की उपाधि से नवाज़ा गया साथ ही 1997 में दिल्ली की मुख्यमंत्री द्वारा “जादू शिरोमणि अवार्ड” से नवाज़ा गया। जादूगर सम्राट को देश ही नहीं बल्कि विदेशो में अनेक अवार्ड्स से नवाज़ा गया। हाल ही 2016 में जादूगर को गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड द्वारा विश्व जादू प्रतियोगिता में सम्मानित किया गया। जादूगर सम्राट वर्तमान में देश के प्रधानमंत्री नरेंदर मोदी के सामने भी अपनी कला पेश कर चुके है

जादूगर सम्राट पिछले 4 दशकों से अब तक पूरी दुनिया में 28000 से ज़्यादा शॉ कर चुके है जिनमे से 25000 शॉ उन्होंने चैरिटी के लिए किये। जादूगर सम्राट ने जब-जब देश पर कोई आपत्ति आयी उन्होंने शो किये और फण्ड इकट्ठे करके विभिन्न राहत कोषों में अब तक 1 करोड़ 70 लाख से ज़्यादा रूपये जमा करा चुके है।

जादूगर शंकर सम्राट का कहना है कि जादू 64 कलाओं में से एक कला है जिसको उपयोग उन्होंने जीवन भर लोगो के लिए केवल मनोंरजन के लिए किया। उनका जादू देखने के बाद अनेक लोग उनसे मिलने आये और उनको अपने फायदे के लिए तरह-तरह के प्रलोभन दिया। लेकिन जादूगर सम्राट ने कभी अपनी कला का ग़लत इस्तेमाल किया बल्कि इससे लोगो की भलाई में ज़रूर लगाया।

वर्तमान में जादूगर सम्राट शंकर राजस्थान योग संस्थान के उपाध्यक्ष है साथ ही श्री गंगानगर में 1980 से इनके द्वारा योग दिव्य मंदिर चलाया जा रहा है झा पर निशुल्क योग की शिक्षा प्रदान की जाती है सम्राट शंकर का कहना है कि आज कल जिस प्रकार मनोरोग और मानसिक विकृतिया बढ़ रही है उनका निराकरण योग साधना द्वारा ही संभव है जादूगर अपनी जादू की कला जोकि हिंदुस्तान जैसे देश में विलुप्त होती जा रही है को पुनर्जीवित रखने के लिए दिल्ली के आस पास के क्षेत्र में एक जादू अकादमी खोलने के लिए प्रयासरत है जादूगर सम्राट भारत में मौजूद अनेक भ्रान्तिओ और अंध विश्वास को ख़त्म करने के लिए जनता को शिक्षित भी करते है वह कहते है जादू एक कला है जोकि अन्य 64 कलाओं में से एक है

अब तक जादूगर सम्राट पर राजस्थान फ़ीचर फ़िल्म “लाडलो” , इनकी जादू यात्रा पर बनी डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म और एक सफल टीवी सीरियल का निर्माण और नेशनल टीवी पर सैकड़ो बार इनके शॉ और इंटरव्यू दिखाए जा चुके है

जादूगर सम्राट कहते है कि इस लम्बे और सफल सफर को तय करने के पीछे उनकी पत्नी का भी श्रेय है क्योंकि कई बार जादूगर सम्राट को अपने शॉ के सिलसिले में काफ़ी दिनों तक बाहर रहना पड़ता था उस दौरान उनकी पत्नी ने पारिवारिक ज़िम्मेदारिओ को बखूबी निभाया। …आज भी दोनों शादी के दौरान ग़ायब होने की घटना को याद कर मुस्कुरा उठते है|

तो दोस्तों ये थी जादू की दुनिया के बेताज बादशाह जादूगर सम्राट शंकर की पूरी शादी की कहानी। … अगर आपकी भी ऐसी कोई कहानी जो है सबको सुननी तो शेयर कीजिये हमारे साथ हम शेयर करेंगे सबके साथ।

जादूगर सम्राट का आने वाली पीढ़ी को संदेश: वह कहते है यदि आपकी कोई बुराई करता है या आलोचना करता है तो आप उसको ज़वाब देने में अपना समय न ख़राब करे बल्कि उस समय को अपने काम में लगाए और फिर आपका काम आपका जवाब देगा।

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