वो कहते है न की जहाँ ऊपर वाली कि वहाँ किसी की नहीं चलती। … …. ऐसा कुछ आपको आज की कहानी को पढ़ने के बाद लगने वाला है

 

यह कहानी है अप्रैल 2014 जब देश भर में लोकसभा के चुनाव चले रहे थे उसी समय हमारी आज की कहानी के किरदार भी गंगा नगरी बनारस में एक पार्टी (आम आदमी पार्टी) के प्रचार के लिए वहा गए थे जहाँ एक तरफ ऋतुराज झा रोहनिया विधानसभा में पार्टी के लिए जोरदार मेहनत कर रहे थे

वही आरती शर्मा भी कुछ कम नहीं उस चिलचिलाती धूप और गर्मी में भी पार्टी का प्रचार करते नहीं थकती थी उस दौरान दोनों एक दुसरे से एक पार्टी कार्यकर्त्ता के तौर पर मिलते जुलते थे और फिर जब चुनाव ख़तम हो गए तो दोनों वापस दिल्ली आ गये और वापस आकर अपनी -अपनी जिंदगी में मशगूल हो गये,

 

पर फिर एक दिन आरती के पास ऋतुराज की फ्रेंड रिक्वेस्ट फेसबुक पर आयी जिसे आरती ने स्वीकार भी कर लिया और दोनों के बीच बात-चित का दौर भी शुरू होगया। ..पर यह पर भी कहानी कुछ आगे नहीं बढ़ी। .और बात आयी गयी हो गयी। ……इसी बीच दिल्ली में भी विधानसभा के चुनाव आ गये पार्टी ने ऋतुराज की काबिलियत पर भरोसा दिखते हुए किरारी विधानसभा से विधायक का चुनाव लड़ने का मौका दिया और ऋतुराज भी पार्टी के भरोसे पर खरे उतरे। .और भारी भरकम वोटो से चुनाव जीत 2015 में विधायक बने .. ……

आपको बता दे की ऋतुराज इतने जुड़े ज़मीं से जुड़े हुए इंसान है की वो अपनी सफलता का श्रेय वो कभी भी खुद को नहीं देते वो इसके लिए हमेशा से ही अपने परिवार, दोस्तों और उपरवाले को देते है और इस बार भी ऋतुराज उपरवाले का शुक्रिया अदा करने क लिए अजमेर शरीफ दरगाह पर चादर चढ़ाने गए थे ऋतुराज का अजमेर की दरगाह में अथाह विशवास है जब भी उनको कोई परेशानी होती है वो सीधा अजमेर शरीफ जाते है वह जाकर उनको अलग ही सुकून मिलता है। ….

पर इस बार इसबार ऊपर वाला ऋतुराज पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान हो गया था क्यूंकि जैसे ही ऋतुराज दरगाह से बहर निकले ठीक उसी समय आरती का विधायक बनने की बधाई का मैसेज उनके पास आया तो ऋतुराज को याद आया की, अरे! ये तो वही लड़की है जिसे में बनारस में मिला था और फेसबुक पर बात भी हुई थी 

अब आप सोच रहे होंगे की जब दो बार कहानी शुरू हुई और ख़त्म भी हो गयी। .. इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ होगा। .जी नहीं इस बार ऐसा नहीं हुआ जब ऋतुराज दिल्ली आये तो उनका दिल्ली सचिवालय में आना जाना लगा ही रहता था वही पर आरती भी आया जाया करती थी पार्टी के काम से .. और इस दौरान ऋतुराज और आरती कई बार सचिवालय में, तो कभी कॉफ़ी शॉप पर मिले। ..इसी बीच पार्टी के किसी काम से ऋतुराज और पार्टी के कुछ कार्यकर्त्ता को अजमेर शरीफ जाना पड़ा पर ख़ास बात तो यह है की उन कार्यकर्ताओ में आरती भी एक थी।

उस ट्रिप के दौरान ऋतुराज -आरती एक दूसरे के करीब आये और ऋतुराज ने आरती को प्रोपोज़ किया अपनी जीवन संगिनी बनने के लिए। …. परन्तु आरती ने तुरंत हाँ नहीं भरी क्यूंकि उनको लगा की ये विधायक है और में एक कार्यकर्त्ता इनको तो कोई भी अच्छी लड़की मिल सकती है तो फिर ये मुझसे ही क्यों शादी करना चाहते है और सब यही बोलेंगे की आरती ने ही ऋतुराज को शादी के लिए कहा होगा उस वक़्त आरती ने यह कह के टालने की कोशिश की कि मेरे घर वाले नहीं मानेगे, पर ऋतुराज भी कुछ काम नहीं वो कहाँ मानने वाले थे उन्होंने तुरंत कहा मैं सबको मनाऊँगा और ये सब जिम्मेदारी मुझ छोड़ दो…… तब आरती ने कहा अगर तुम घरवालों को मनाने में कामयाब हो गए तो मेरी भी हाँ होगी। ……


यह लोग जब अजमेर से जैसे ही वापस आये ऋतुराज सीधे आरती के घर गए और उनकी मम्मी से मिले और कहाँ मेरी जिंदगी आपके हाँथ में आप ही कुछ कर सकती है। ..आरती की माता जी बहुत ही सीधी सादी है उस वक़्त तो वो कुछ समझी नहीं पर वो उस रात ठीक से सो भी नहीं पाई। फिर उन्होंने अपनी छोटी बेटी अलका से पूछा जो की इन दोनो कैमेस्ट्री को अच्छी तरह से जानती थी पर अलका भी कुछ काम नहीं उन्होंने इन दोनों की लव स्टोरी घरवालों के सामने ऐसी रखी कि घरवाले तुरंत राज़ी हो गये, और फिर आरती की मम्मी ने आरती से पूछा तो इस बार आरती न ना कह सकीं और शादी के लिए हांमी भरदी, इस तरह से आखिर ऋतुराज ने अपना आधा रास्ता पार कर लिया। ….

अब आप सोच रहे होंगे कि आधा रास्ता क्यों? …. अब तो आरती भी मान गयी और उसके घर वाले भी। ..पर कहानी में असली मोड़ तो अब आता है जब ऋतुराज ये सुनकर नाराज हो गए कि ऋतुराज उनकी मर्जी से शादी नहीं करेंगे। …… नाराज़ भी होना जायज़ था भई ऋतुराज के पिताजी चाहते थे की उनका बेटा अब विधायक बन गया है तो उन्हें बहुत बड़े बड़े घर से रिश्ते आ रहे थे जो की भारी भरकम दहेज़ के साथ साथ सरकारी नौकरी वाली लड़की भी मिल सकती थी। ..परन्तु ऋतुराज बहुत ही शांत और ज़मीं से जुड़े हुए इंसान है उन्होंने अपने पिताजी को समझाया कि दहेज़ से पैसे तो मिल जायेगा और कुछ दिन लोग बात करेंगे और फिर भूल जायेंगे पर मुझे मेरा प्यार नहीं मिलेगा। .. ये बात बात पिताजी को समझ आ चुकी थी और इस तरह से दोनों परिवार को एक करके ऋतुराज ने आरती के साथ 5 दिसंबर 2016 को दिल्ली के एक नामी रिसोर्ट में शादी करी, जिसमे की दिल्ली कि दिल्ली के मुख़्यमंत्री समेत काफी बड़ी बड़ी हस्तियों ने शिरकत की….

अंत में ऋतुराज ने हमारे रीडर्स को सन्देश दिया कि जब भी आप किसी के साथ रिलेशन में हो आप उसको अपना 100% दो और रिश्तो को पूरी ईमानदारी के साथ निभाओ। …वही आरती की कहना है कि जब आपका पार्टनर आपको 100% देता है तो आपको भी उसका साथ देने के लिए 200% देना होता है। …

तो यह है हमारी आज की पूरी शादी की कहानी आपकी ज़ुबानी। ……. 
आप अपने विचार हमे कमेंट के माधयम से तथा मैसेज करके बता सकते है और आपको आज की कहानी पसंद आये तो LIKE & SHARE करना न भूले


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