इस गाने के बोल बिलकुल फिट बैठते है हमारी आज की कहानी पर….

जिसको बचपन में खेलने को न मिला हो
जवानी जीने को न मिली हो ……
पर बुढ़ापे में किया ऐसा काम कि ज़िंदगी बन गयी मिसाल। ..

 

आज की कहानी है बंगाल की रहने वाली 65 वर्षीय प्रतिमा देवी की , जिनको बचपन से लेकर जवानी तक किस्मत ने ऐसे सितम दिए की उनको पता ही नहीं चला की खिलोने से खेलने वाला बचपन और जवानी का सुख किसे कहते है ..बात है आज से 58 साल पहले की। … जब प्रतिमा केवल 7 साल की थी बचपन के खेलने की उम्र में ही प्रतिमा के हाँथ पीले कर दिए गए और खिलोनो की जगह अब घर के चौके-चूल्हे ने ले -ली थी

पर शायद किस्मत को प्रतिमा पर फिर भी तरस नहीं आया,जिससे प्रतिमा की शादी हुई उसने पहले दिन से ही उसे नौकरो की तरह रखा, न तो वह प्रतिमा को पहनने के लिए कपड़े देता था और न ही खाने को खाना। साथ ही शराब पी-कर रोजाना प्रतिमा को मारा-पीटा करता था रोजाना प्रतिमा को भूखे पेट सोना पड़ता था प्रतिमा इस रोज रोज की जिल्लत भरी जिंदगी से तंग आ चुकी थी और एक दिन उसने अपनी इस जिंदगी से छुटकारा पाने के लिए आत्महत्या करने का फैसला कर लिया। .. लेकिन ऊपर वाले को शायद कुछ और ही मंज़ूर था प्रतिमा ने कई बार आत्महत्या की कोशिश की पर हर बार नाकाम रही। 

कई बार नाकाम रहने के बाद प्रतिमा ने आत्महत्या के फैसले को छोड़ दिया और उन्होंने अपनी पति का घर छोड़ कर दिल्ली आने का फैसला किया उस वक़्त प्रतिमा की उम्र 30 साल थी। .दिल्ली आने के बाद न उसके पास कोई रहने का कोई ठिकाना और न ही कुछ काम…. बावज़ूद इसके प्रतिमा ने हिम्मत नहीं हारी और उसने अपने आप को ज़िंदा रखने के लिए दिल्ली में घरों में काम करके अपनी शुरुआत की जिसमे उनको मात्र 100 रूपए महीने ही मिला करते थे लेकिन कुछ दिनों के बाद उनका मन नहीं लगा और प्रतिमा ने कूड़ा बीनना शरू कर दिया।


दिल्ली जैसे बड़े शहर में कोई अपना न होने पर प्रतिमा ने अपना साथी गली -मोहल्ले के कुत्तो को बना लिया। … जिंदगी में मानव जात से मिले दुखो की अपेक्षा प्रतिमा को एक जानवर से प्रेम के बदले प्रेम मिला, प्रतिमा के ससुराल और गाँव में सबसे अच्छे दोस्त कुत्ते ही थे तो यहाँ भी प्रतिमा ने आदमी से ज्यादा कुत्तो पर भरोसा किया और उनसे दोस्ती कर ली। .धीरे-धीरे प्रतिमा के इन दोस्तों की संख्या बढ़ने लगी वो रोजाना जितना कमाती थी उसका लगभग पूरा हिस्सा वो कुत्तो के खाने पर खर्च कर देती,बदले में प्रतिमा के ये दोस्त उसको बहुत सारा प्यार देते थे जैसे जैसे कुत्तो की संख्या में इज़ाफ़ा होने लगा प्रतिमा को उनके लिए खाना जुटाने में भी दिक्कत होने लगी, इसके लिए प्रतिमा ने कूड़ा बिनना छोड़ चाय और खाना बेचना शुरू कर दिया जिससे वे उतना पैसा कमा लेती थी की वो आसानी से कुत्तो का पेट भर सके।

आज प्रतिमा के पास लगभग 400 कुत्ते है जिनके लिए वो रोजाना खाना बनाती है उनके बीमार होने पर उनकी देख भाल करती है चाहे वे खुद भूखे पेट सोये पर वो कुत्तो को खाना खिलाना नहीं छोड़ती। …. लेकिन ये सब करना भी इतना आसान नहीं था दो साल पहले उनकी कुत्ते की देखभाल करने की जगह को M.C.D ने तोड़ दिया और कई लोगो ने कुत्तो को गाड़ी के निचे कुचल दिया। ..पर कुछ अच्छे लोग और संस्थाओ ने प्रतिमा की भी मदद करी।

जिस वजह से वे अपने इस काम को लगातार करते आ रही है। … प्रतिमा देवी का कहना है कि सड़को पर घूमने वाले जानवर के बारे में लोगो को सोचना चाहिए। इन बेजुबान जानवर के हम लोग ही तो सहारा है और अगर हम इनको खाना और इनकी देखभाल नहीं करेंगे तो कौन करेगा?

प्रतिमा देवी को 2014 में यस बैंक के पॉपुलर चॉइस अवार्ड के लिए भी नामांकित किया गया था आजकल प्रतिमा देवी खुद बीमार रहती है पर वो इसके बावजूद बिना रुके हर दिन अपने कुत्तो की निःस्वार्थ सेवा करती है
दोस्तों ये भी एक शादी की कहानी है जिसने एक इंसान को परेशानियाँ झेलते हुए इतना मज़बूत बना दिया की वो खुद एक मिसाल बन गया……

आपको ये कहानी कैसी लगी कमेंट बॉक्स में जरूर बताये और दोस्तों के साथ शेयर करना न भूले!

Categories: INSPIRING STORY

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