मिसाल: मिलिए एक ऐसी महिला से जो कर रही है एक ऐसे समाज के लिए काम,जिसके बारे में बात करने से अक्सर कतराते है लोग…..

आज हर कोई सुप्रीम कोर्ट द्वारा  377 धारा के पक्ष में दिए गए फैसले के बारे में बात कर रहा है हर कोई अपनी सोशल DP बदल कर उसको इंदरधनुष के रंगों से सजा रहा है लेकिन क्या सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लोग अपनी सोच बदल देंगे?

क्या समाज LGBTQ समाज (समलैंगिक) को बराबरी का दर्जा दे पायेगा? क्या समलैंगिक भी एक आम इंसान की ज़िंदगी जी सकेंगे? 

सब सवालो के ज़वाब में अक्सर लोग चुप्पी लगा लेते है लेकिन कोई है जो इनके बारे में भी सोचता है कोई है जो इनके हक़ की लड़ाई भी लड़ रहा है कोई है जो उनको भी एक इंसान मानता है और वो है दिल्ली की रहने वाली रीना राय।

जोकि एक महिला होने के बावजूद उस समाज के हक़ की लड़ाई लड़ रही है जिनके बारे में लोग बात करने से कतराते है या उनको समाज में जिल्लत भरी नज़रो से देखते है रीना दिल्ली में अपने परिवार के साथ रहती है और अपने घर से ही ट्रांस-क़्वीन नाम की संस्था चलाती है रीना ने वर्ष 2017 हिंदुस्तान में एक ऐसी प्रतियोगिता आयोजित की… 

जो हिंदुस्तान इससे पहले कभी नहीं हुई और यह प्रतियोगिता थी ट्रांस जेंडर के बीच।

दिल्ली के एक नामी होटल में इस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, इस प्रतियोगिता में दिल्ली ही नहीं बल्कि समूचे भारत से ट्रांस जेंडर समाज के लोगो ने  इस प्रतियोगिता से भाग लिया,जिस दिन इस प्रतियोगिता का रिजल्ट आया उस दिन इस अनोखी प्रतियोगिता को कवर करने के लिए न केवल हिंदुस्तान अपितु विदेशी मीडिया ने भी इस प्रतियोगिता को अपने ख़ास स्टोरी के रूप में पेश किया। 

 

लेकिन इस तरह की प्रतियोगिता को आयोजित करने के पीछे क्या कारण था और क्या है इसके पीछे की दास्ताँ।

रीना बताती है कि कुछ साल पहले जब वो पार्लर जाया करती थी तो वहां उनकी मुलाक़ात एक ऐसे ही समलैंगिक लड़के से हुई जो दिखने में तो एक आम लड़को जैसा था लेकिन दिमागी रूप से लड़की था.

जिस वजह से उसके हाव -भाव और व्यवहार भी लड़की जैसा ही हो गया था जब भी रीना पार्लर जाती वो लड़का उनसे काफी सारी बाते किया करता, इस वजह से दोनों काफी घुल मिल गए, लेकिन कुछ दिन के बाद रीना ने उस पार्लर में जाना छोड़ दिया और उस लड़के ने भी।

 

.. इसके बाद रीना अपनी ज़िंदगी में बिजी होगयी, लेकिन कुछ  समय बाद जब रीना किसी दूसरे बड़े नामी पार्लर में गयी तो देखा कि वही लड़का जो उस वक़्त दिखने में लड़का जैसा दिखता था वो एक दम लड़की जैसा दिख रहा है .

जैसे ही उस उस लड़के ने रीना को देखा तो वह अपना सारा काम छोड़ रीना से मिलने आया और उनके गले लग कर बोला कि दीदी मैंने आपको कितना मिस किया और आपसे मिलने की बहुत कोशिश की लेकिन आपसे मिल नहीं पाया, रीना भी उसके रूप को देख कर अचंभित हो गयी थी इसलिए उनके मन में यह जानने की उत्सुकता काफी ज्यादा थी तो उसने अपनी पूरी कहानी बताई और बताया कि काफी सारी सर्जरी और काफी सारे मनोवैज्ञानिक टेस्ट के बाद उसको ऐसा रूप मिला है,

पर इस रूप को मिलने के बाद और इसके पीछे की जो दास्ताँ उसने रीना को बताई उसको सुनने के बाद रीना के ज़हन  में इस समाज को लेकर समाज में मौज़ूद कुरीतियों और इनके सामजिक वहिष्कार का  कड़वा सच सामने आया.

उसकी कहानी सुनने के बाद रीना ने ठान लिया कि चाहे कुछ भी हो जाये वो इस समाज और इस तरह के लोगो के लिए कुछ ख़ास ज़रूर करुँगी  और इनको इनका हक़ दिलवाकर  रहेंगी ,

परन्तु रीना के लिए ये सब करना इतना नहीं था जब रीना ने अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से इस समाज के उत्थान के लिए राय मांगी तो सभी लोगो ने रीना का विरोध करते हुए उनको ही समलैंगिकों के समाज का हिस्सा कहने लगे, बावजूद इसके रीना ने हार नहीं मानी और उन्होंने अकेले ही इस प्रतियोगिता को पूरा करने का जिम्मा उठाया, और आखिरकार इसको मुकाम तक पहुंचाया।

 

इस अनोखे काम के लिए रीना को पिछले एक साल में अनेकों पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है इतने सारे सम्मान मिलने के बाद, रीना का कहना है कि उनका सफर अभी काफी लम्बा है वो जब तक LGBTQ समाज को उनका हक़ नहीं दिला देती तब तक वो रुकेंगी नहीं, फिर चाहे उनका कोई साथ दे या नहीं।

और इस साल भी रीना 7 अक्टूबर को मुंबई के ललित होटल में इस प्रतियोगिता का आयोजन करने जा रही है LQBTQ पर आये सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद रीना काफी खुश है |

लेकिन एक तरफ चिंतित भी है क्योंकि प्रशाशनिक फैसला आने के बाद भी सामाजिक मान्यता ज़रूरी है और वह कहती है कि सिर्फ सोशल DP बदलने से नहीं बल्कि अपने दिल की DP को इंद्रधनुष के रंगो से सजाओगे के फर्क तभी आ पायेगा।


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