Film ” Betaab” ka yeh Geet ” Jab hum jawan honge, jane kahan honge “ to aapne Zaroor  suna hi hoga

Lagta h aaj k humare couples is gane se kafi inspired hain

Aajki humari kahaani ke real hero and heroin hai  “Uttam kedia and Priti kedia”...

यह कहानी है बोकारो (झारखण्ड) में रहने वाले तीन -तीन साल के दो बच्चों की… जिनके नाम हैं “उत्तम केडिया” और “प्रीति अग्रवाल”।..

दोनों का एडमिशन नर्सरी क्लास (Holi Cross School, Bokaro) में एक साथ हुआ, क्लास 10th के बाद दोनों ने एक साथ ही Higher Studies के लिए Delhi Public Shool, Bokaro, में एडमिशन करवाया। 

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Class nursery pic : Holy cross school,Bokaro steel city,Jharkhand ( 1984)

Class 12th : Delhi public school,Bokaro steel plant Jharkhand ( 1999)

यहाँ उनके बच्चपन की दोस्ती और गहरी हो गयी। 12th क्लास तक आते आते इनकी गहरी दोस्ती कब प्यार में बदल गयी उनके पता ही नहीं चला।

समय अपनी गति से बढ़ता गया और फिर 12th Exams के बाद आगे की पढाई के लिए दोनों ने फिर से एक साथ दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया। तब तक इनका प्यार काफी गहरा हो चला था, .दोनों ने साथ में जीने मरने की कसमें भी खा ली थी।

आपको बता दे की दोनों के परिवार अच्छे दोस्त होने के साथ साथ समाज के(Bokaro) नाम-चीन व्यक्तियों में से एक थे, साथ ही दोनों परिवार आर्थिक रूप से भी लगभग  एक सामान ही थे, ऐसे में दोनों के प्यार को शादी में बदलने में कोई मुश्किल नहीं आनी थी।

लेकिन वक़्त ने उनके लिए कुछ और ही सोच रख़ा था……

जब दोनों एक साथ B.Com द्वितीय वर्ष की पढाई कर रहे थे, उस दौरान उत्तम के

पिताजी अपने बिज़नेस को और आगे बढ़ाने के लिए राजस्थान शिफ्ट हो गए, और ऐसे में उत्तम भी अपनी ग्रेजुएशन कम्पलीट करके अपने पिताजी को सपोर्ट करने के लिए राजस्थान चले गए। पर उत्तम के पिताजी को राजस्थान में काफी व्यपारिक नुक्सान हो गया…

 

वही दूसरी तरफ प्रीति ने अपने परिवार में उत्तम के साथ शादी करने की बात कही, लेकिन आर्थिक अनिश्चित्ता की वजह से प्रीति के परिवार ने उत्तम के साथ शादी से इंकार कर दिया। ऐसे में प्रीति ने भी अपने परिवार के खिलाफ जाना उचित नहीं समझा और काफी भारी मन से उत्तम को अपने रिश्ते को ख़त्म करने को कहा।

ये समय दोनों के लिए ही काफी दर्द भरा था,  दोनों ने इतना समय एक दुसरे के साथ बिताया था, साथ जीने मरने की कसमे खायी थी।

दोनों के लिए यह वक्त काफी कठिन था। …..

इस समय प्रीति बोकारो में थी तथा उत्तम करीब 1500 K.M. दूर राजस्थान में , दोनों शायद ही अब कभी मिल पातेI

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लेकिन वक़्त ने उनके लिए कुछ और ही सोच रख़ा था……

कुछ महीनो बाद, प्रीति आगे की पढाई (Fashion Designing) करने दिल्ली आयीं, और उधर उत्तम भी राजस्थान में बिजनेस की सम्भावनाओ को कम देखते हुए दिल्ली आ गये।..ऐसे में दोनों फिर एक बार दिल्ली में थे और दोनों ही अपने कॉलेज के दिनों में रहने वाले P.G. में ही रहने लगे, जो कि काफी पास पास में ही थे, लेकिन ख़राब परिस्थित्यों से गुजरने के बाद दोनों एक दुसरे से मिलने से झिझकते थे। 

ऐसे में उत्तम ने प्रीति से दुबारा मिलने का सिलसिला शुरू करने के लिए लोन पर एक बाइक ली, नयी बाइक दिखाने और उसकी ख़ुशी मनाने के लिए उत्तम प्रीति से मिलने गए और उसदिन दोनों ने काफी समय बाद एक साथ शाम बितायी।  यहाँ से एक बार फिर उनके मिलने जुलने का दौर शुरू हुआ।

एक तरफ जहां दोनों एक दुसरे को ज्यादा वक़्त देने लगे, वही दूसरी तरफ उत्तम ने अपना बिजनेस स्टार्ट किया जिस पर वो पूरी तरह फ़ोकस थे। दोनों एक दुसरे से मिलने का कोई मौका नहीं छोड़ते थे, ऐसे में उनके पुराने जस्बाद एक बार फिर बहार आने लगे और इस बार इनका प्यार पहले से और भी गहरा और मज़बूत था। एक बार फिर दोनों ने साथ में जीने मरने की कसमें खायीं।

जल्द ही प्रीति का फैशन डिज़ाइनिंग कोर्स पूरा होने के बाद अपने घर बोकारो वापस चली गयी और अब उत्तम का नया बिजनेस भी सैट हो चूका था,  ऐसे में मौका पाकर प्रीति ने अपने परिवार वालो से उत्तम से शादी करने की बात कही जो की इसबार उन्हें माननी ही पड़ी, और  दोनों के परिवारों ने मिलकर उनके मैरिज को “Arrange” करवाया।

इस तरह बचपन के दोस्त 3rd फ़रवरी 2005 को शादी के पवित्र बंधन में बंध गए……. ..

आज उत्तम और प्रीति की शादी को लगभग 13 साल से ज़्यादा हो चुके है, उनके दो बच्चे भी है। फ़िलहाल उत्तम और प्रीति दिल्ली में अपने माता पिता के साथ दिल्ली में ही सेटल्ड हैं. और एक खुशहाल जीवन का आनंद लेते है। ..

 

कपल मैसेज :उत्तम कहते है कि किसी भी रिश्ते में धैर्य और समझदारी बहुत जरुरी है फिर वो चाहे लव मैरेज हो या अरेंज,क्यूंकि पति और पत्नी एक अलग -अलग बैकग्राउंड से आते है जिनको आपस सहयोग और समझ कर साथ चलना होगा। ….

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